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Monday, May 11, 2015

मुहब्बत हो रही बदनाम मेरे अफ़साने बहुत हैं

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मुहब्बत हो रही बदनाम मेरे अफ़साने बहुत हैं,
तेरे इस शहर में अब तो  मेरे दीवाने बहुत हैं |

तेरी आंखों के समंदर में मिले है नशा इतना,
वरना कहने को तो इस शहर में मैखाने बहुत हैं |

यूँ  ही खिलते हुए फूलों को झड़ते देखा है मैंने,
जिन्हें अंजाम देने को यहाँ बेगाने बहुत हैं |

तेरे कूचे में आकर दिल की कश्ती डूब जाती है,
मगर तुम देखो तो हम प्यार में अनजाने बहुत हैं |


मेरी रातें तेरी यादों से सजी रहती हैं लेकिन,
मुझको डर है तो बस इन यादों के ठिकाने बहुत हैं |

हर्ष महाजन