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Friday, June 12, 2015

*वो शख्स इस तरह मुझे बदनाम कर गया



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वो शख्स इस तरह मुझे बदनाम कर गया,
दिल में छुपे वो राज़ सर-ए-आम कर गया ।

दिलचस्प बात ये कि उसे इल्म ही नहीं,
नादानियों में हवस मिरे नाम  कर गया ।

रुक्सत हुआ तो दिल में लिए बोझ था बहुत,
वो जाते-जाते दोस्ती नीलाम कर गया ।

नफरत नहीं मुझे मगर आँखों मेंहै नमी,
वो शख्स इस तरह मुझे बे-दाम कर गया ।

रुतबे पे अपने मुझको था क्या-क्या गुमाँ मगर,
इक पल में सारे शहर में तमाम कर गया

हर्ष महाजन

221 2121 1221 212

*एक तरही गजल दिए गये मिसरे पर