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Monday, April 11, 2016

अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता



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अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता,
ये हस्ती तक बिखर जाती मुझे इंतज़ार हो जाता |
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मैं कुछ अपने गुनाहों से परेशाँ और मुमकिन ये,
अगर मैं खोल देता दिल वो फिर राजदार हो जाता |

न मस्ती में चले थे हम न मस्ती को ही भूले थे,
अगर तीरे नज़र चलता ये दिल आर-पार हो जाता |

अमानत थी किसी की और आखों में कशिश इतनी,
मैं थोड़ा भी मचल जाता तो दिल तार-तार हो जाता |


बिछुड़ के रो चुका हूँ बे-वजह उस पे था दिल इतना,
न पगलाता ज़हन मेरा तो मैं होशियार हो जाता |


-----हर्ष महाजन