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Wednesday, June 1, 2016

बुझते दिए दिल के जलें कुछ और बात है




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बुझते दिए दिल के जलें कुछ और बात है,
फिर जाम आँखों से चलें कुछ और बात है |
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उनके जुनूं में पी लिए ये जाम-ए-अश्क बहुत,
कुछ जाम लब से भी पियें कुछ और बात है |

दिन रात जिनकी याद में पीते सभी मगर,
गुलदान में कलियाँ सजें कुछ और बात है |

रिश्तों में तल्खी हो मगर तुम हो न बेवफा,
कलियाँ कली से खुद जलें कुछ और बात है |

अब तक सही न बंदिशें परवाज़ पर कभी,
वो ख्वाब अनजाने मिलें कुछ और बात है |


हर्ष महाजन



2212-2212-2212-12