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Saturday, June 18, 2016

चाँद छुप जाएगा घूंघट तो हटाकर देखो

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चाँद छुप जाएगा घूंघट तो हटाकर देखो,
शाम तन्हाई में आँखें तो मिलाकर देखो |


मेरी आहट ही रुला देगी ज़माने भर को .
गर वो जानेंगे मैं ज़िंदा हूँ बताकर देखो |


मैं ही दौलत हूँ शहर भर से हटा दो मातम,
जो बुझे हैं वो चिरागों को जलाकर देखो |

जो रकीबों की तरह फिरते हैं साए लेकिन,
दर-कदम उनको मेरी साँसे सुनाकर देखो |


ज़ुल्म कोई हो मेरा सब वो तुम्हीं से रौशन,
उनको नज्में मेरी ग़ज़लें तो दिखाकर देखो |


जो भी अफ़साने बने सब ही मज़ा लेते हैं,
गर हो अखबार पुरानी तो उठाकर देखो |



हर्ष महाजन

बहर:-
2122-2122-2122-22