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Sunday, June 19, 2016

ऐ खुदा दिल में कभी उसके जिकर आएगा

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ऐ खुदा दिल में कभी उसके जिकर आएगा,
हुई रहमत तो तू पत्थर से निकल आएगा |


ये तो सोचा भी न था चाँद यूँ होगा मद्धम,
दी थी आवाज़ वो कश्ती में उतर आएगा | 


मुझको मालूम था मसरूफ वो तन्हाई में,
उसमें लावा था जो सदियों से पिघल आएगा | 


हैं अना उसमें समझता हूँ मैं, झुकता भी हूँ,
लफ़्ज़ों –लफ़्ज़ों में वो टुकड़ों में बिखर आएगा |


आओ अब लौट चलें नींद से करवट लेकर,
वरना नगमों से भरा जाम
छलक आएगा |

हादसा इश्क का हकीकत में यूँ उछला शायद,
हर जुबां पर कभी अपना भी जिकर आएगा |

हर्ष महाजन 


2122-1122-1122-22
1122-1122-1122-22

(रमल मुसम्मन मखबून मह्जुफ़ मकतू )
* ज़हर चुपके से बड़ी शान से खाया होगा