Follow by Email

Monday, June 20, 2016

आँखों से टपकता हर कतरा, आंसू होगा तुम क्या जानों


...

आँखों से टपकता हर कतरा, आंसू होगा तुम क्या जानों,
दे खुशियों में भी संग मेरा, आंसू होगा तुम क्या जानों |

जब रूह तडपे फिर चश्म झरें, उनको ही आंसू कहते हैं,
जब कपट झरे अखियन से ज़रा, आंसू होगा तुम क्या जानों |

गम में वो कभी दामन में गिरें, उनको ही आंसू कहते हैं,
कभी टपक पड़े बैरंग कतरा, आंसू होगा तुम क्या जानों |

ख़्वाबों में अखियाँ नम हों कभी, उनको ही आंसू कहते हैं,
जब छल बन पलकों से उतरा, आंसू होगा तुम क्या जानों |

जब कतल हों अरमां टपक पड़ें, उनको ही आंसू कहते हैं,
गर बे-मौसम अखियों से गिरा, आंसू होगा तुम क्या जानों |


______________हर्ष महाजन