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Monday, July 25, 2016

अपने होटों पे सदा हम तो दुआ रखने लगे




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अपने होटों पे सदा हम तो दुआ रखने लगे,
बे-वफाओं से भी हम तो अब वफ़ा रखने लगे|

है हुनर चुपके से धड़कन में उतर जाने का बस,
पर जो दुश्मन हैं बहुत दिल में सजा रखने लगे |

ज़िंदगी दी है खुदा ने और दी ये भी अदा ,
गर उठे उँगली नियत पर तो अना रखने लगे |

हम तो थे बेताब कड़कें बिजलियाँ बन के सदा,
पर लबालब खुद को अश्कों में सदा रखने लगे |

हम तो प्यासे थे बहुत, नदिया तलाशी थी मगर,
पर फलक भी बादलों में अब हवा रखने लगे |

थी दुआ उनकी चले जाएँ अभी दुनियां से हम,
हो असर इतना दुआ में हम दुआ रखने लगे |

नफरतें औ साजिशें हम पर फिदा होने लगीं,
ले मुक़द्दर हाथ में हम भी अदा रखने लगे |


हर्ष महाजन
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2122 2122 2122 212
(रमल मुसम्मन मह्जुफ़)