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Tuesday, April 12, 2016

मुझे ग़म है मेरा कोई यहाँ दीवाना नहीं है




मुझे ग़म है मेरा कोई यहाँ दीवाना नहीं है,
यक़ीनन दुनियाँ ने मुझको यहाँ पहचाना नहीं है  

हुआ हूँ पारा-पारा देख ज़माने की अदाओं को,
मुझे क्यूँ लगता था कोई यहाँ बेगाना नहीं है

चले तलवारों की माफ़िक़ ज़ुबाँ अपने क़रीबों की,
लगे वैसे भी अब मौसम यहाँ सुहाना नहीं है

हुए हमदर्द अब दुश्मन खुदाया दे क़फ़न मुझको,
यहाँ बे-दर्द दुनियाँ में मेरा ठिकाना नहीं है  

तज़ुर्बा हो गया मुझको सहे जब शोले नफ़रत के,
हुई जो साज़िशें पर 'हर्ष' यहाँ अनजाना नहीं हैं

हर्ष महाजन 




एक पुरानी कृति (ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए)

Monday, April 11, 2016

मुझसे रुठोगे अगर तुम तो किधर जाऊंगा




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मुझसे रुठोगे अगर तुम तो किधर जाऊंगा,
मैं हूँ आईना तेरा टूटा तो बिखर जाऊँगा |

कुछ तो होती है खलिश चेहरा बदलने वाले,
दिल में चाहत तो रहेगी मैं जिधर जाऊँगा |

लोग कहते हैं नशा गम को भुला देता है,
अब जो मैखाना मिलेगा मैं उधर जाऊँगा |

रौशनी दे के शमा खुद को जला देती है,
यूँ मिटाओगे अगर खुद को किधर जाऊँगा |

मैंने किस्मत में गिरफ्तार-ए-वफ़ा चाहा था,
तुम जो गैरों से निभाओगी सिहर जाऊँगा |

हर्ष महाजन

बहर :- रमल मुसम्मन मखबून मह्जुफ़ मकतू
2122-1122-1122-22

गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है


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गाफिल, तू मुझको ये बता किस-किस पे नज़र है,
चलना मगर, इस राह की, मुश्किल ये डगर है |

इंसान की तहजीब पर दौलत का है दखल ,
पर भूलता है मुक्तसिर उसका ये सफ़र है |

किस-किस करम से जूझता है आदमी यहाँ,
अब क्या किये, ज़ुल्मो सितम, खुद को भी खबर है |

इतना कहर था बादलों का उजड़ी बस्तियां,
टूटा, लगे बरसात का जितना भी सबर है |

जिनके लिए हंसती रही जो आँखें उम्र भर,
छोड़ा हैं, ऐसा गम वहाँ अब तक वो असर है |

०००
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हर्ष महाजन
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अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता



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अगर दिल पर मेरे उसका कभी इख्तियार हो जाता,
ये हस्ती तक बिखर जाती मुझे इंतज़ार हो जाता |
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मैं कुछ अपने गुनाहों से परेशाँ और मुमकिन ये,
अगर मैं खोल देता दिल वो फिर राजदार हो जाता |

न मस्ती में चले थे हम न मस्ती को ही भूले थे,
अगर तीरे नज़र चलता ये दिल आर-पार हो जाता |

अमानत थी किसी की और आखों में कशिश इतनी,
मैं थोड़ा भी मचल जाता तो दिल तार-तार हो जाता |


बिछुड़ के रो चुका हूँ बे-वजह उस पे था दिल इतना,
न पगलाता ज़हन मेरा तो मैं होशियार हो जाता |


-----हर्ष महाजन