बोलती ग़ज़लें

ग़ज़ल एक छंद काव्य है | एक लम्बा सफ़र तय कर आजकल ये जिस मुकाम पर है इसने अपने अंदर उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओँ को सम्मिलित किया है | अपने सफ़र में नज़ाकत और नफ़ासत के कई तेवर बदलती हुई प्रस्तुत ग़ज़लें अपने बनाव और श्रृंगार में कई जगह शराब और शबाब में मदहोश नज़र आती है और फिर कई जगह गम से लबरेज़ तथा खुद अहसासों का चित्रण ब्यान करती हैं | अल्फास तो खुद दास्ताँ बन ग़ज़ल का सत बयाँ कर देते हैं | आम आदमी से जुड़ी और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर मेरी कलम से निकली पसंदीदा कुछ ग़ज़लें |

Sunday, March 1, 2026

तिरी एक ही नज़र से मेरा दिल मचल न जाये

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  ◆◆ तिरी एक ही नज़र से मेरा दिल मचल न जाये, कि पिघल के मोम जैसा ये वजूद ढल न जाये । मिरी आँख का सितारा तिरी राह देखता है, कोई अश्क बन क...
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इन आँखों की हँसी ने भी अजब बदलाव देखा है

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  ■■ इन आँखों की हँसी ने भी अजब बदलाव देखा है, मगर दुनिया की नज़रों में वही ठहराव देखा है। महकती थी जहाँ खुशबू मुहब्बत की फ़ज़ाओं में, वहाँ...
Friday, February 27, 2026

रात भर तेरे गम में चाक रहे

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 ◆◆ रात भर तेरे गम में चाक रहे, आँख भर-भर के जाम चलते रहे, इक झलक पाने को तेरी अब तो, यूँ ही चढ़-चढ़ के दाम चलते रहे | क्यूँ ये रातें हैं अब अ...
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Thursday, February 26, 2026

दिलों को जीत लेती हैं तुम्हारी ये वफ़ाएं हैं,

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   ◆◆ दिलों को जीत लेती हैं तुम्हारी  जो   वफ़ाएं हैं , मगर दुनिया के हाथों में पुरानी ही जफ़ाएं हैं । दुआओं में असर की ...
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Tuesday, February 24, 2026

कोई मय मिली न ही हम-सफर

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  ■■ कोई मय मिली न ही हम-सफर, कोई मैकदा भी मिला नहीं, जो फ़ज़ा में घोल पिलायेगा, कोई ऐसी दिल की दवा नहीं । वो तो ख्वाब था जो धुआँ हुआ, ज...
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Friday, February 20, 2026

ढलने लगी ये सांझ तो मुझको भुला दिया

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  ◆◆ ढलने लगी ये सांझ तो मुझको भुला दिया, इक ज़िंदगी ने ज़िंदगी को ही रुला दिया । वो जब मिले तो यूँ मिले इक ख्वाब की तरह, दिल के मचलते...
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दिन भी हुआ धुआँ-धुआँ

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  ◆◆ दिन भी हुआ धुआँ-धुआँ , रातें हुईं  उदास, अब आदमी के बीच हुआ आदमी खलास। रहबर ही जब न मुल्क में छोड़ें कोई कसर, पहने हुए हैं जिस्...
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