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अपने आँगन में कोई गैर न पाला जाए,
गर कोई अपना मिले उसको संभाला जाए ।
घर की इज़्ज़त पे किसी गैर की हो आँख अगर,
ऐसा हो शख्स कोई घर से निकाला जाए ।
जब भी हो जाये किसी गैर पे विश्वास कभी,
उसकी पुश्तों को भी इक बार खंगाला जाए ।
टूटकर रिश्ते कभी दिल से कहीं मिल जाएं,
ऐसे रिश्तों में कभी ज़हर न डाला जाए ।
दूर नज़रों से चला जाये कोई अपना तो 'हर्ष',
भूल कर उसपे यूँ पत्थर न उछाला जाए ।
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2122 1122 1122 22(112)
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