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Monday, April 30, 2018

अगर दुआएँ मिलीं हार टल तो सकती है (तरही)

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अगर दुआएँ मिलीं हार टल तो सकती है ।
ये राजनीति है किस्मत बदल तो सकती है ।

कहीं चलेगी अगर बात अब मुहब्बत की,
दबी जो दिल में है सूरत निकल तो सकती है ।

ज़ुदा हुआ जो मैं तुझसे बिखर ही जाऊँगा,
मगर बिछुड़ के भी तू दिल में पल तो सकती है।

हवा के  संग चले जो बशर जमाने की,
"मिले न छाँव मगर धूप ढल तो सकती है ।"

महक रहें हैं जो गुल अपनी रंगों-खुशबू पर,
किसी भी भँवरे की नीयत फिसल तो सकती है|

वतन से होगी अगर रहनुमाओं को उल्फ़त,
ये सच है हालते सरहद सँभल तो सकती है।
न पूछा हाल कभी उसने गैर की ख़ातिर,
वो साथ मेरे ज़नाज़े के चल तो सकती है

समझ के भी न रखी दूरी गर हसीनों से,
दिया जले न जले उँगली जल तो सकती है ।

हर्ष महाजन
1212 1122 1212 22