Wednesday, November 11, 2020

मुझको हरसूं नशा सा रहता है


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मुझको हरसूं नशा सा रहता है,

जैसे मुझमें खुदा सा रहता है ।


चाहतों का जो पूछो मुझसे कभी,

उनसे क्यूँ दिल जला सा रहता है ।


फिर भी रहता है ख़ौफ़ मुझमें क्यूँ ,

दिल भी ख़ुद से डरा सा रहता है ।


बोझ लगती हैं राहें भी अपनीं,

ज़ख्म गहरा हरा सा रहता है ।


जब भी नज़दीक होती मन्ज़िल तो,

दर्द भी फिर भला सा रहता है ।


----हर्ष महाजन 'हर्ष'

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2122 1212 22

Friday, September 11, 2020

जाने क्यूँ आज है औरत की ये औरत दुश्मन,

 

जाने क्यूँ आज है औरत की ये औरत दुश्मन,
पास दौलत है तो उसकी है ये दौलत दुश्मन ।

दोस्त इस दौर के दुश्मन से भी बदतर क्यूँ हैं,
देख होती है मुहब्बत की हकीकत दुश्मन ।

माँग लो जितनी ख़ुदा से भी ये ख़ुशियाँ लेकिन,
हँसते-हँसते भी हो जाती है ये जन्नत दुश्मन ।

मैं बदल सकता था हाथों की लकीरों को मगर,
यूँ न होती वो अगर मेरी मसर्रत दुश्मन ।

ऐसे इंसानों की बस्ती से रहो दूर जहॉं,
'हर्ष' हो जाए मुहब्बत की मुहब्बत दुश्मन ।

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2122 1122 1122 22


Wednesday, August 26, 2020

जाम खाली सामने खलते रहे



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जाम खाली सामने खलते रहे,
ज़ख़्म दिल के दिल में ही पलते रहे l

नीदों से जब हो गए हम बेदखल,
साथ बीते दिन सभी खलते रहे ।

चाँद जब बदली से फिर-फिर झाँकता,
दिल में उठते कुछ भँवर छलते रहे ।

ज़िन्दगी वीरान जब होने लगी,
सपने फिर बन ख़ौफ़ सँग चलते रहे ।

इन लबों पर क्यूँ भला आती हँसी,
आफ़ताब-ए-इश्क़ में जलते रहे ।

-हर्ष महाजन 'हर्ष'

2122 2122 212
'दिल के अरमां आंसुओं में बह गए'

Friday, August 21, 2020

अपने जीते जी ये दवा कर ले

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अपने जीते जी ये दवा कर ले,
मौत से पहले ही दिया कर ले ।

बेवफा और दुनियाँ में कातिल,
कर दे कामिल तु या फनां कर ले ।

हम तो हैं वक़्त के सुनो पाबंद,
मेरे संग मिल के ये दुआ कर ले ।

मैं तो घबरा गया हूँ इस जग में,
या ख़ुदा मुझ्को आशना कर ले ।

दर्दे ग़म अपनों का सहूँ कितना,
आ ख़ुदा दुनियाँ से जुदा कर ले ।

जो तू चाहे दिवानगी से अगर,
प्यार की आ तू इंतिहा कर ले ।

धौंकिनी सी लगी चले दिल पर,
दिल से दिल आ के मुब्तिला कर ले ।

कोई पूछेगा मुझसे क्यूँ आखिर,
आके कोई भी मशविरा कर ले ।

चाँद तो पहले ही ख़फ़ा लेकिन,
कोई तो मुझसे फिर वफ़ा कर ले ।

मेरा मकसूद मेरी मंज़िल पर,
है तुझे ग़म तो आ गिला कर ले ।

है तू अब भी मुहब्बतों में अगर,
लग ज़िगर और हौंसला कर ले ।


-------हर्ष महाजन 'हर्ष'

2122 1212 22(112)
"मेरी किस्मत में तू नहीं शायद"

Tuesday, August 11, 2020

लगा दोस्तों को गँवारा नहीं था

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लगा  दोस्तों को  गँवारा नहीं था,
तभी महफ़िलों में पुकारा नहीं था ।

ज़ुदा तो हुए सब बहे अश्क़ इतने,
मग़र अश्क़ कोई हमारा नहीं था ।

ये चाहा करूँ बेदख़ल उनको ख़ुद से,
मग़र हमको दिल का इशारा नहीं था ।

बहुत मात लहरों को दी हमने लेकिन,
समंदर में कोई, किनारा नहीं था ।

लकीरों में हर पल थे ढूँढा किये हम,
अभी दिल से जिनको उतारा नहीं था ।

सफर तो दिलों का था मुश्किल नहीं पर,
अना में किसी ने पुकारा नहीं था ।

उठी इतनी नफ़रत अचानक दिलों में,
जुदाई बिना अब गुज़ारा नहीं था ।

हमें हमसफ़र अब मिले भी तो कैसे,
मुक़द्दर का कोई भी मारा नहीं था ।

---------हर्ष महाजन 'हर्ष'

122 122 122 122
"तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँ ।"

Wednesday, August 5, 2020

जो दुश्मन है कभी तुमको नहीं अपना कहा करते,

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जो दुश्मन है कभी तुमको नहीं अपना कहा करते,
ये कलयुग है यहॉं अपने नहीं अपने हुआ करते ।

कभी मैंने किसी का भी बुरा चाहा नहीं अब तक,
मगर किस्मत ने हाथों में लिखी ठोकर तो क्या करते ।

जिन्हें है ग़म कि दुनियाँ में क्युँ ऊपर है ख़ुदा उनसे,
हुआ मंज़र तबाही का ख़ुदा भी क्या वफ़ा करते ।

नहीं मैं बेख़बर अब रूबरू हूँ मौत से लेकिन,
यहाँ पर दोस्त दुश्मन से भी बदतर क्यूँ जफ़ा करते ।

ज़माने में हुआ करते है ऐसे भी ये मंज़र क्यों,
वफ़ा करके भी आंखों में समन्दर क्यों रहा करते ।

------हर्ष महाजन 'हर्ष'

1222 1222 1222 1222
"मुहब्बत हो गयी जिनको वो परवाने कहां जाएं"

Monday, August 3, 2020

गर मुहब्बत सहारा नहीं

सुफआना कलाम

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गर मुहब्बत सहारा नहीं,
दुश्मनी से गुज़ारा नहीं ।

पास अपने बुला लो हमें,
या तो कह दो तुम्हारा नहीं ।

दूरियाँ सह न पायेंगे हम,
तेरे बिन अब गुज़ारा नहीं ।

प्यार मिलता है तकदीर से,
फिर मिलेगा दुबारा नहीं ।

अपने मन पे है कैसा गरूर,
हो सका ये हमारा नहीं ।

'हर्ष' है तो ख़ुशी हर तरफ़,
दूर हुए गर ख़ुदारा नहीं ।

हर्ष महाजन 'हर्ष'

ख़ुदारा= किसी चीज़ का छोटा सा अंश

बहर:
212 212 212 

*ज़िन्दगी प्यार का गीत है*