तेरी सोहबत में दिल ये संभल जाएगा,
कर यकीं अब नहीं तो ये जल जाएगा ।
कर यकीं अब नहीं तो ये जल जाएगा ।
देख लेना कभी इश्क़ इन आँखोँ में,
थोड़ी चाहत दिखाना मचल जाएगा ।
तू ख़फ़ा है मुझे ये पता था मगर,
पर यकीं ये नहीं था बदल जायेगा ।
दिल में खामोशियाँ अब हैं पलने लगीं,
थोड़ा बहला देगा ये उछल जाएगा ।
हमसफ़र छोड़ मेहमान बन तू मुझे,
कैसे कर लूँ यकीं मुझको छल जाएगा ।
हर्ष महाजन 'हर्ष'
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