Friday, February 20, 2026

ढलने लगी ये सांझ तो मुझको भुला दिया

 

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ढलने लगी ये सांझ तो मुझको भुला दिया,
इक ज़िंदगी ने ज़िंदगी को ही रुला दिया ।

वो जब मिले तो यूँ मिले इक ख्वाब की तरह,
दिल के मचलते प्यार में तूफाँ जगा दिया ।

लेकिन तू मुझको ये बता, मुझसे था क्या गिला,
इन साजिशों के शोलों में, दिल तक जला दिया ।

बदली की भाँति आये, बरस कर यूँ चल दिये,
मेरी हसीन चाह को, झटका लगा दिया ।

बे-वक़्त काली रात में, डूबे हैं इस तरह
ज्यूँ रोशनी को 'हर्ष' ने खुद ही दगा दिया ।

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मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
221 2121 1221 212


दिन भी हुआ धुआँ-धुआँ

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दिन भी हुआ धुआँ-धुआँ, रातें हुईं उदास,
अब आदमी के बीच हुआ आदमी खलास।

रहबर ही जब न मुल्क में छोड़ें कोई कसर,
पहने हुए हैं जिस्म पे सब काग़ज़ी लिबास।

फूँका किए हैं दूसरों के घर जो अब तलक,
अब अपने ही मकाँ का नहीं होता है अभास।

वादों का क्या कि काँच हैं, बस एक ठेस से,
टूटेंगे इस तरह से कि होगा नहीं उजास।

शिकवों के डर से आज भी मिलते नहीं हैं लोग,
इस शहर-ए-बे-हिसी में भला 'हर्ष' किसकी आस।
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शहर-ए-बे-हिसी=भावनाओं से रहित शहर

Wednesday, February 18, 2026

अपने आँगन में कोई गैर न पाला जाए

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अपने आँगन में कोई गैर न पाला जाए,
गर कोई अपना मिले उसको संभाला जाए ।

घर की इज़्ज़त पे किसी गैर की हो आँख अगर,
ऐसा हो शख्स कोई घर से निकाला जाए ।

जब भी हो जाये किसी गैर पे विश्वास कभी,
उसकी पुश्तों को भी इक बार खंगाला जाए ।

टूटकर रिश्ते कभी दिल से कहीं मिल जाएं,
ऐसे रिश्तों में कभी ज़हर न डाला जाए ।

दूर नज़रों से चला जाये कोई अपना तो 'हर्ष',
भूल कर उसपे यूँ पत्थर न उछाला जाए ।

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Tuesday, February 17, 2026

कितना था तंज उसके हर उठते सवाल में

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कितना था तंज उसके हर उठते सवाल में,
कुछ वो भी मुझसे तंग था कुछ मैं भी हाल में ।

चाहा जिसे वो शख्स था, मेरे ही ख्याल का,
वैसा नहीं था लुत्फ किसी के जमाल में ।

कैसे भी रंग दे दिल को, मुहब्बत के रंग से,
उम्रें गुजार दूँगा मैं फिर, देख भाल में।

नफरत मिटा सका न मैं, उसके मिजाज से
वाहिद मैं जी रहा हूँ उसी के मलाल में ।

कितना अलग था शख़्स वो, कितना था खुश-नशीं,
लेकिन मिला न कोई मुझे, उसकी मिसाल में ।

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मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
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Tuesday, August 29, 2023

न दिल में रखना अना तू इतनी, कि वो मुहब्बत निगल न जाये

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न दिल में रखना अना तू इतनी, कि वो मुहब्बत निगल न जाये,

ख्याल रखना कि बिन तुम्हारे ये दिल से धड़कन निकल न जाये ।


तुम्हारी यादें हैं मेरी मंज़िल, तुझी से मेरा है आशियाँ अब,

बता दो तुम राजे दिल भी अपना, कहीं ये डर मुझको छल न जाये ।


थकी हैं पलकें हैं खुश्क आँखे, फ़क़त ये उलझन है बेबसी की,

हुए जो इतने निशब्द लब अब, कहीं ये चुप दिल को खल न जाए ।


ज़रा तो दिल में उतर के देखो, तमाम किस्से बदल गए हैं,

बड़ा ही दुश्मन है ये ज़माना, निगाहें उनकी निगल न जाये ।


उठी जो दिल पे ख़लिश सी इतनी, नज़र भी करती सवाल कितने,

कि अब अँधेरों की सरसराहट में दिल के अरमां ही ढल न जाये ।


हर्ष महाजन 'हर्ष'

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"छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेरा कि जैसे मंदिर में लौ दिए की"

Monday, June 13, 2022

अगर दूसरा प्यार छूकर गया है

 

अगर दूसरा प्यार छूकर गया है,
समझना हया का वो पर्दा उठा है ।

ज़ुबां पर भी चर्चे यूं होंगे जहां में,
यूं देखोगे तंजो से हर दिल भरा है ।

बहुत चाहोगे दिल से तुम गुनगुनाना,
मगर देखोगे साज टूटा पड़ा है ।

यूं निकलेंगे दिल से जो गम के फसाने,
लगेगी तुम्हें ज़िंदगी इक सज़ा है ।

बुलंदी मिलेगी मुहब्बत में लेकिन,
लगेगा ये इल्जाम तू बेवफ़ा है ।

हर्ष महाजन 'हर्ष'

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"तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं"


Monday, April 4, 2022

उनके किस्से नए भी पुराने लगे

 

उनके किस्से नए भी पुराने लगे,
जो भी दिन थे पुराने सुहाने लगे ।

उनकी ज़ुल्फ़ों तले शाम होगी कभी,
ऐसा मौसम बना पर ज़माने लगे ।

ज़ख्म नखरों ने उनके दिए थे बहुत,
आहें निकली तो उनको तराने लगे ।

जिनके आने से दिल था समंदर हुआ,
गैर की बाहों में दिल लुटाने लगे ।

रो पड़ा था फलक बेवफा देखकर,
फिर पुराने बहाने सुनाने लगे ।

हर्ष महाजन 'हर्ष'
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"तुम अगर साथ देने का वादा करो"